About me…

अपने बारें में कहने को कुछ ज्यादा है नहीं. १९४६ में शुरू हुआ सफ़र अभी जारी है. इस दौरान ज़िन्दगी को बहुत करीब से देखा. उसके कई रंग,उतार चढाव , उठा पटक, दौड़ भाग, मेहनत और रस्साकशी, रंजो गम और ढेर सारी खुशिओं से बाबस्ता रहा हूँ मैं. अपने इसी लम्बे सफ़र में बहुत से लोगों से मिलने का इत्तफाक भी रहा. शायद इसलिए मैं कह सकता हूँ की लोगों को समझने और पढने की कुछ समझ है मुझमे. स्वाभावसे बहुत अधिक भावनात्मक हूँ, इसलिए दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना बचपन से करता आया हूँ. हालांकी इसमें बहुत से जख्म भी खाएं हैं. पढने लिखने का शौक हमेशा से रहा और ये बहुत काम आया है अपनी इन्ही भावनाओं और मन में उठते हुए उदगारों को व्यक्त करने में. केंद्रीय विद्यालय संगठन में करीब ३ दशकों तक नौकरी के बाद अब घर पर ही हूँ. जब मन करता है खाली पड़े पन्नों पर कुछ न कुछ लिख लेता हूँ…

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