How could a Politician be so unassuming?

अप्रैल को द पायनियर अखबार में एक पाठक की चिट्ठी छपी है. उक्त पाठक ने अपने नाम की जगह ‘एक भारतीय’ लिखा है. अंगरेजी के पूरे पत्र का हिंदी भाव है. ‘हाल ही में जब मैं गोवा से दिल्ली लौट रहा था, तब मुझे यह देख कर आश्चर्यजनक खुशी हुई कि गोवा के मुख्यमंत्री भी उसी विमान से यात्र कर रहे थे. ऐसा नहीं है कि यह पहला मौका था, जब मैं उस विमान में सफर कर रहा था, जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्री या कोई राजनीतिज्ञ हों. लेकिन गोवा से उड़ान भरने से दिल्ली एयरपोर्ट तक उतरने के दौरान उन्होंने मुझे बेहद प्रभावित किया. वह अनुभव आज भी मेरे जेहन में कैद है. मैं यह याद करने की कोशिश करता हूं कि पिछली बार मैंने कब किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को फ्लाइट पकड़ने के लिए आम आदमी की तरह लाइन में लगते देखा है? कोई कार्यकर्ता, सुरक्षा गार्ड या कोई परिजन नहीं. वह अपना सामान खुद ढो रहे थे. वह कम किराये वाले इकोनॉमी क्लास में सफर कर रहे थे. जबकि वह फर्स्‍ट क्लास में सफर कर सकते थे. वह विमान पर चढ़ने वाले अंतिम व्यक्ति नहीं थे और न ही उनके लिए विमान रोक कर रखा गया था. वह गो एयर के विमान में वैसे ही चढ़े, जैसे कि साधारण यात्री चढ़ते हैं. ऐसा लगा, जैसे कोई वीआईपी नहीं, साधारण आदमी विमान में चढ़ रहा है. बिल्कुल समय पर. अन्य लोगों की तरह, वह भी गेट पर लाइन में लगे और जब उनकी बारी आयी, तभी विमान में चढ़े. वह आगे की पंक्ति में नहीं बैठे थे, जबकि जिन विमानों में फर्स्‍ट क्लास सीट नहीं होती, उनमें आगे की सीटें बड़े और प्रभावशाली लोगों के लिए सुरक्षित रहती हैं. वह चुपचाप तीसरी या शायद चौथी कतार की सीट पर बैठ गये. कोई तामझाम नहीं. मुझे ऐसा लगा कि विमान में सवार अधिकतर लोगों को यह नहीं पता था कि वह कौन हैं? इसलिए उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं था. विमान परिचारकों ने उन पर उतना ही समय दिया, जितना दूसरे यात्रियों पर. जब मैंने अपने बगल के साथी को यह बताया, जो मेरे साथ ही यात्र कर रहा था, तो उसने कहा कि मुख्यमंत्री के बगल की सीट जरूर खाली होगी या फिर उनके कार्यालय की तरफ से ही दो सीट बुक करायी गयी होगी, ताकि उन्हें कोई डिस्टर्ब न करे. लेकिन जब मैं वाशरूम से लौट रहा था, तो देखा कि उनके बगल की सीट पर भी कोई यात्री बैठा है. उनकी कतार की सारी सीटें भरी हुई थीं. कोई विशेष सुविधा नहीं. विशेष सुविधा की मांग भी नहीं. जब विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, तो वह उतरने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे. जबकि आमतौर पर यही होता है कि कोई वीआईपी अन्य यात्रियों से पहले उतरता है. उसके लिए पहले से विशेष कार तैयार रहती है, इसके बाद ही अन्य यात्रियों को उतरने की अनुमति दी जाती है. इस मामले में वह न तो उतरने वाले पहले व्यक्ति थे और न ही उनके लिए कोई कार इंतजार कर रही थी. न ही उन्हें कोई रिसीव करने आया. अन्य यात्रियों की तरह वह भी एक ही बस से एयरपोर्ट टर्मिनल पहुंचे. फिर से उन्होंने अपना सामान ट्राली पर उठाया और बाहर खड़ी कार तक आये, जो उन्हें लेने आयी थी. बस में कुछ यात्रियों ने उन्हें पहचान लिया था और उन्होंने उनसे बातचीत भी की. बातचीत से एक बात स्पष्ट थी कि वह न सिर्फ जेंटलमैन हैं, बल्कि बिल्कुल सहज भी हैं. अपने पद का कोई गुमान नहीं. बिल्कुल सरल आचरण. शर्ट-पैंट और काले जूते पहने. बेहद साधारण लिबास. आम राजनीतिज्ञों की वेश-भूषा से अलग. मैं यह जानता था कि वह आईआईटी से पासआउट होने वाले भारत के किसी राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं. मैंने यह भी सुना था कि वह गोवा की गंदी राजनीति को साफ करने का प्रयास कर रहे थे. मैंने जो पहली नजर में पाया, वह आश्चर्यचकित करने वाला था.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s