Soggy Biscuits…

बारिश के दिन थे और हमारे येहाँ अधापकों के पद के लिए साख्षात्कार चल रहे थे. इसके दौरान बोर्ड के सदस्यों को चाय इत्यादि का प्रावधान करना ही पड़ता था. दो दिन से एक सदस्य बार बार कह रह थे की बिस्कुट जो उनकी प्लेट में रखे जातें हैं सीले ( Soggy ) होते हैं. उनको बताया भी गया की बारिश के मौसम में ऐसा हो ही जाता है. फिर भी उनकी शिकायत बरक़रार थी. बात मुझ तक पहुंची तो मैंने सुझाव दिया की कल से प्लेट में बिस्कुट के कुछ बंद पकेट रख दिए जायं. अगले दिन ऐसा ही किया गया. मैं भी उस समय बोर्ड रूम में ही था जब चाय लायी गयी. चाय के साथ बिस्कुट के बंद पकेट देखकर उन सज्जन ने मेरी ओर देखा. बोले अब ठीक है. चाय उनको दी गयी, उन्होंने बिस्कुट का एक पकेट खोला और हाथ से एक बिस्कुट बाहर निकाला. देख कर संतोष किया की बिस्कुट कड़क है और इससे पहले वो उसे खाते, उस बिस्कुट को उन्होंने चाय के कप में डुबोया और फिर खाया. पहली बार तो मैंने सोचा की शायद गलती से ऐसा हो गया होगा. क्यूंकि जो सज्जन दो दिन से बिस्कुट के सीले होने की शिकयत कर रहे थे वो ऐसा कैसे कर सकते हैं. पर फिर उन्होंने दूसरा बिस्कुट निकाला और उसके बाद तीसरा और दोनों ही बार उन्होंने बिस्कुट चाय में डूबा कर खाया. मेरी आजतक ये बात समझ में नहीं आयी की जब उन्होंने बिस्कुट को गीला कर के ही खाना था तो उसके कड़क न होने की शिकायत वो किस लिए कर रहे थे. चालीस वर्ष गुज़र गए पर आज भी मैं इस प्रश्न का सही उत्तर ढून्ढ नहीं पाया हूँ. . .

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