हमारे साहब की ऑस्टिन..

बात साठ के दशक की है. हमारे साहब ने एक पुरानी ऑस्टिन कार खरीदी और उसे ऑफिस के लान में लाकर खड़ा कर दिया. हम लोग ऑफिस में सब मिलाकर. कुल ८ लोग ही थे. कार देखने की उत्सुकता में सभी लोग व्याकुल थे. पर डर लगता था की पता नहीं साहब क्या सोचें. फिर भी सबने बारी बारी से बाथरूम की खिड़की से जाकर उस कार की एक झलक देखि. देखने में कार एकदम किसी संग्रालय से लाई हुई लगी. कार काले रंग की थी और उसका बोनेट देखने में करीब करीब पुराने रोड रोलर जैसा दीखता था. बोनेट बजाय सामने से खुलने के दोनों साइड से खोला जाता था. सामने हेड लाइट के नाम पर दो झूलते हुए से हंडे लगे थे. दरवाजे बीच से खुलने के बजाय बोनेट के पास लगे हान्डेल से खुलते थे. कार के अन्दर प्रवेश सिर्फ अगले दरवाजे से ही था. अन्दर दो बेन्च्नुमा सीट्स थीं और अन्दर पिछली सीट पर जाने के लिए अगली सीट को उठाना पड़ता था. डेशबोर्ड से बहुत बाहर निकला हुआ स्टेरिंग वील था जिसपर बेंत की बुनाई की गयी थी. डेश बोर्ड में भैंस की आँखों की तरह के दो मीटर लगे थे.कुल मिलाकर मै इतना ही देख पाया बाथ रूम की खिड़की से और अन्दर हाल में जाकर अपने साथिओं को इसका आँखों देखा विस्तृत हाल बताया. वे बोले ” तभी तुम्हे इतनी देर लगी बाथ रूम में”. इतने में लंच टाइम हो गया. सबलोग ऑफिस से बाहर एक गुमटी पर चाय पीने जाते थे. जाते जाते लगभग सभी ने मुड कर इस अजूबे को देखा. रुक कर देखने की किसी हिम्मत ही नहीं थी. जब हम लौटे तो देखा की हमारे साहब तो कार के अन्दर स्टीरिंग पर हैं और ऑफिस का चपरासी बोनेट के आगे झुका हुआ कुछ कर रहा है. उत्सुकता वश एक दो लोग आगे बढे देखने के लिए की माजरा क्या है. इतने में साहब खुद ही बोले की कार को हान्डेल लगाना पड़ रहा है क्यूंकि ठण्ड में शायद बटरी डाउन हो गयी है. आज उनके बोलने का अंदाज़ कुछ अलग सा था. कुछ नरमी और कुछ झेंप. शाम तक कार स्टार्ट नहीं हुई. उसके बाद २-३ दिन तक कार वहीँ खड़ी रही. एक दो मेकानिक आये भी पर किसी कारण वश बात बनी नहीं. शायद पैसे कुछ ज्यादा मांग रहे थे और हमारे साहब थोडा हाथ खींच कर चलने में यकीन करते थे. फिर उन्होंने सक्सेना साहब को बुलाया जिनसे उन्होंने कार खरीदी थी. सक्सेना जी ने न जाने बोनेट में मुह डाल कर क्या किया की कार एक ही झटके में स्टार्ट हो गयी. हमारे साहब की बांछे खिल गयी. उन्होंने उस दिन पहली बार सभी ऑफिस वालों को चाय पिलाई…

इस कार के बहुत किस्से हैं..पर अभी के लिए इतना ही…अगली पोस्ट का इंतज़ार करें..

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