काले और गोरे का फर्क…

काले और गोरे का फर्क…

एक विमान अपनी अंतराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने ही वाला था, तभी एक महिला जल्दी में अपना बैग लिए हांफती हुई विमान में घुसी. विमान परिचारिका ने उसका बैग थामा और इकोनोमी क्लास में खाली पड़ी एक सीट की ओर चली. जब महिला ने अपने बगल वाली सीट पर एक अश्वेत पुरुष को बैठे देखा तो उसने वहां बैठने से ये कह कर मना कर दिया की वो इस असभ्य अश्वेत पुरुष की बगल में बैठकर यात्रा नहीं कर सकती. परिचारिका ने कहा की इकोनोमी क्लास में अब येही एक सीट खाली है. इसके अलावा कुछ सीट सिर्फ फर्स्ट क्लास में खाली हैं. उस महिला को दो मिनट इंतज़ार करने को कह कर वो विमान के कैप्टेन के पास पूछने गयी की क्या फर्स्ट क्लास में खाली पड़ी सीट पर कुछ एडजस्टमेंट संभव है? लौट कर उसने बताया की वैसे एयर लाइन इस तरह के एडजस्टमेंट नियमानुसार करती नहीं है पर कैप्टेन ने इस विशेष परिस्थिति के मद्दे नज़र इस एडजस्टमेंट की परमीशन दे दी है. इससे पहले की वो महिला कुछ बोलती, विमान परिचारिका ने उस अश्वेत पुरुष से कहा की ” सर आपको थोड़ी दिक्कत तो होगी पर कैप्टेन ने आपको आदर सहित फर्स्ट क्लास ले जाने को कहा है. चलिए मैं आपका बैग लेकर आपको वहां लिए चलती हूँ.” परिचारिका का ये कहना था की विमान में बैठे सभी लोग उठकर तालियां बजाने लगे. उस महिला की शकल देखने लायक थी. ताली बजाने वालों में अधिकतर लोग, विमान परिचारिका, दूसरा स्टाफ और कैप्टेन सभी श्वेत थे…

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