केंद्रीय विद्यालय संगठन – और मैं…

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७ अक्टूबर…

आज के ही दिन १९७० में मेरी नियुक्ति केंद्रीय विद्यालय संगठन में हुई थी.

देखते देखते 45 साल गुज़र गए और अब तो रिटायर हुए भी समय हो चूका है. इन सारे वर्षों का पूरा लेखा जोखा तो लिखना मुश्किल है पर बहुत सी सुखद यादें है जो आज भी मन को गुदगुदा जाती हैं. बहुत लगन मेहनत और इमानदारी से काम किया और जहाँ तक हो सका सबकी मदद भी की.

आज भी मुझे अपने वो पुराने साथी याद आते हैं जो अक्सर कहा करते थे की शर्माजी क्यों इतनी मेहनत करते हो कोई पदमश्री तो मिलनी नहीं है. पर मुझे वो सब कुछ मिला जिसकी मैंने उम्मीद भी शायद नहीं की थी. अपने सहकर्मियों का विश्वास और आदर. पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मुश्किल लगता है की कैसे पल पल करके मैंने काम सीखा और न सिर्फ सीखा बल्कि उसे अपने सेवा काल में आगे भी बढाया और मैं अपने इसी काम की वजह से पहचाने जाना भी लगा. न सिर्फ आयुक्त और अन्य अफसर बल्कि मंत्रालय तक में भी लोग मुझे पसंद करने लगे.

कई बार काम करते करते रात के ११-१२ भी बज जाते थे और फिर एक नयी सुबह, वही लगन, वही जोश और कुछ हासिल करने की तमन्ना लेकर मैं बढ़ता रहा. अपनी ज़िन्दगी के बेहतरीन वर्ष मैंने केंद्रीय विद्यालय संगठन में बिताये. आज इतने वर्ष के बाद भी बहुत से पुराने मित्र और सहकर्मी हैं जिनसे मेरा संपर्क निरंतर बना हुआ है.

अपने इन्ही वर्षों की मशक्कत, खट्टी मीठी यादों को शब्दों में पिरोने का प्रयास जारी है . पूरा होने पर अवश्य शेयर करूँगा…

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